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भोपाल एम्स की रिसर्च:खुद ही डॉक्टर मत बनिए… इसी कारण 60% मरीजों पर एंटीबायोटिक दवाएं बेअसर

भोपाल एम्स की रिसर्च:खुद ही डॉक्टर मत बनिए... इसी कारण 60% मरीजों पर एंटीबायोटिक दवाएं बेअसर

  • मध्य प्रदेश सहायक प्रमुख प्रवीण कुमार दुबे 8839125553

फाइल फोटो - Dainik Bhaskar
  • 3,330 मरीजों को महीनों तक निगरानी में रखा… नतीजा जो दवाएं काफी कारगर मानी जाती थीं, उनसे उन्हीं बीमारी में ठीक होने में अब हफ्तों लग रहे

एम्स भोपाल की ताजा रिसर्च में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। कई एंटीबायोटिक दवाएं अब मरीजों पर पहले जैसा असर नहीं कर रहीं। यूरिन इंफेक्शन से लेकर फेफड़ों और खून के संक्रमण तक, कई बीमारियों में इस्तेमाल होने वाली दवाएं बेअसर हो रही हैं। नतीजा- पहले जो बीमारी 2-3 टैबलेट में ठीक हो जाती थी, अब उसके लिए हफ्तों लग रहे हैं। यह रिसर्च 3,330 आइसोलेट्स मरीजों पर की गई। इनमें 2,664 नेगेटिव और 666 पॉजिटिव बैक्टीरिया शामिल थे।

जनवरी 2025 से जून 2025 के बीच हुई रिसर्च में सामने आया कि यूरिन इन्फेक्शन में दी जाने वाली सिप्रोफ्लॉक्सासिन दवा अब ई.कोलाई बैक्टीरिया पर सिर्फ 39% असर दिखा रही है। यानी हर 10 में से 6 मरीजों पर यह दवा बेअसर हो चुकी है। मेरोपेनेम दवा, जो केलबसीएला न्यूमोनिया बैक्टीरिया के इलाज में दी जाती थी, अब सिर्फ 52% मामलों में ही असर कर रही है।

बिना दवा के ही उतर सकता है बुखार… पहले जो बुखार या संक्रमण दो गोली में ठीक हो जाता था, अब उसे ठीक होने में हफ्तों लग रहे हैं। डॉक्टर दवा बदलते रहते हैं, फिर भी असर कम दिखता है।

भास्कर एक्सपर्ट – डॉ. पंकज शुक्ला, पूर्व डायरेक्टर एनएचएम

वायरल बुखार में एंटीबायोटिक जरूरी नहीं

  • वायरल बुखार, खांसी के 90% और दस्त के 75% मामलों में एंटीबायोटिक की जरूरत नहीं होती। लेकिन, लोग बिना डॉक्टर की सलाह दवा ले लेते हैं।
  • तीन दिन में ज्यादातर वायरल अपने आप ठीक हो जाते हैं। कोई भी एंटीबायोटिक देने से पहले कल्चर और सेंसिटिविटी टेस्ट जरूरी है। इससे पता चलता है कि कौन-सी दवा कारगर रहेगी।
  • फामासिस्ट शेड‌्यूल एच-1 एंटीबायोटिक बिना पर्चे के नहीं दें। एक व्यक्ति के पर्चे की दवा दूसरे को नहीं दें। हर जिला अस्पताल में माइक्रोबायोलॉजिस्ट नियुक्त करें।
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